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सहूलियत

  मेरी कोशिशें सिर्फ़ कोशिशें हैं,  उनका मुकम्मल होना टिका है, तुम्हारी सच्चाई पर, तुम्हारे मन के उस दर्पण पर , जिस पर तुमने पर्दा डाल दिया है, और उस पर्दे के पीछे, तुमने छिपा रखी है सहूलियत, सहूलियत शब्दों की, रिश्तों के समीकरणों की, मैं समझ नहीं सकता तुम्हारी सहूलियत को,  क्यूँकि मेरी कोशिशें सिर्फ़ कोशिशें हैं।  - जयेन्द्र 

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